Tuesday, April 14, 2026
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महिला समूहों के सशक्तिकरण के लिए सामुदायिक सुविधा केंद्र का उद्घाटन
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर हाथीबाहरा में कार्यक्रम, महिला आजीविका को मिलेगा बढ़ावा…

हाथीबाहरा/महासमुंद, 14 मार्च। शिखर युवा मंच एवं सी.एम.एस. फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम हाथीबाहरा में 10 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सामुदायिक सुविधा केंद्र (CFC) का उद्घाटन एवं महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों की आजीविका को मजबूत करना, स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देना तथा समुदाय आधारित विकास को प्रोत्साहित करना है।
शिखर युवा मंच और सी.एम.एस. फाउंडेशन द्वारा बागबाहरा ब्लॉक के 20 गांवों में आजीविका आधारित विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इनमें बकरी पालन, महिला समूहों द्वारा वाशिंग पाउडर निर्माण, बकरी के गोबर से जैविक खाद तैयार करना, बकरी के दूध से साबुन बनाना तथा चार-चिरौंजी प्रोसेसिंग जैसी पहलें शामिल हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान सामुदायिक सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया गया, जहां महिला समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों—जैविक खाद, बकरी दूध से बने साबुन, वाशिंग पाउडर, बकरी के लिए नीम तेल, पशु आहार (पचपन परास) और बीज बैंक—के उपयोग एवं लाभों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था प्रमुख भूपेश वैष्णव ने बताया कि शिखर युवा मंच पिछले 28 वर्षों से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों, युवाओं तथा महिला समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि बागबाहरा ब्लॉक के 20 गांवों में बकरी पालन आधारित आजीविका गतिविधियों के माध्यम से किसानों और महिला समूहों की आय बढ़ाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
शासकीय मिडिल स्कूल हाथीबाहरा के शिक्षक शेखर चंद्राकर ने कहा कि संस्था द्वारा गांव में बकरी पालन के साथ-साथ स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति भी जागरूकता अभियान चलाया गया है। संस्था के कार्यकर्ताओं को गांव में “आजीविका मित्र” के रूप में जाना जाता है, जो ग्रामीणों को आजीविका संबंधी गतिविधियों में मार्गदर्शन देते हैं।
इस अवसर पर बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुति दी गई, जिससे समारोह का माहौल उत्साहपूर्ण हो गया।
परियोजना समन्वयक किशन साहू ने बताया कि इस परियोजना के तहत अब तक 10 गांवों के 100 परिवारों को 400 बकरियों का वितरण, 100 परिवारों को सोलर लाइट तथा 100 परिवारों को बायोमास चूल्हा प्रदान किया गया है। इसके साथ ही किसानों की आय बढ़ाने के लिए 2000 फलदार पौधों का रोपण कराया गया है।
महिला समूहों को आजीविका से जोड़ने के लिए विभिन्न गांवों में उत्पादन इकाइयां स्थापित की गई हैं। ग्राम भोथा की जय मां शीतला महिला समूह को वाशिंग पाउडर निर्माण, ग्राम गुलझर की जय बड़ा देव महिला समूह को बकरी गोबर से जैविक खाद निर्माण, ग्राम टेका की जय मां पहाड़ा वाली महिला समूह को बकरी दूध से उत्पाद निर्माण तथा ग्राम मातरबाहरा की जय मां चंडी महिला समूह को चार-चिरौंजी प्रोसेसिंग मशीन उपलब्ध कराई गई है।
इसके अलावा परियोजना के तहत जल संरक्षण और कृषि विकास के लिए भी कार्य किए गए हैं। ग्राम भोथा में 5 चेकडैम की मरम्मत और 3 तालाबों का गहरीकरण कराया गया है, जबकि बिछलादादर, हाथीबाहरा, बोकरामुड़ाखुर्द और टेका में तालाबों के गहरीकरण से किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हुआ है और मछली पालन को भी बढ़ावा मिला है।
कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले महिला समूहों, आजीविका मित्रों और बकरी पालकों को सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर संस्था प्रमुख भूपेश वैष्णव, सुरेन्द्र निर्मलकर, जनक यादव, रोहित कुमार, लिलिसिंग बरिहा, किरण नेताम, दिनेश्वरी ठाकुर, यशोदा बरिहा, नसरीन बेगम, डॉ. रामेश्वर गितलाहरे, दिलहरण केवट, साक्षी वैरागी, अंजली राजपूत, ओमप्रकाश चन्द्रा, शिक्षक शेखर चंद्राकर, खेमचंद चक्रधारी, राजकुमार चंद्राकर सहित लगभग 170 प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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